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Ashutosh pandey
30 October 2017 7:29:37 AM UTC in HIndi Shayari

मिरे ख्यालों की कंघी ने लाख सुलझाए

मिरे ख्यालों की कंघी ने लाख सुलझाए 
न निकले गेसुए जाना के पेचोखम देखो
हसीं चेहरे पे ज़ुलमे बिखेर कर उसने
दिलो निगाह पे ढाए मेरे सितम देखो
(guest)

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