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hindi shayari

Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
चाँद तुम चाँदनी मैं तुम्हारी प्रिये
पुष्प तुम गंध की मैं कहानी प्रिये
तुम चुमन हो चुमन का एहसास एहसास हूँ मैं
रक्त तुम रक्त कि मैं रवानी प्रिये
Ashutosh pandey
Ashutosh pandey
इक रोज़ मिल ही जाएंगे दुनिया कि भीड़ में
भटके हुओं को राह दिखाते रहे हैं लोग
खुशबू महक रही ग़रीबों के खून की
जिन मंजिलों में जश्न मनाते रहे हैं लोग
Ashutosh pandey
बख्शी है जिन चिरागों ने दुनिया को रौशनी
अफ़सोस वो चिराग बुझाते रहे हैं लोग
लम्हा कोई सुकूँ का मयस्सर ना हो सका
बीते दिनों कि याद दिलाते रहे हैं लोग
Ashutosh pandey
अफ़सोस हो रहा है इसी बात पर मुझे
सदियों से खून अपना बहाते रहे हैं लोग 
खुशियाँ मेरे मकान के अन्दर ना आ सकें 
खाटें हमारे दर पे बिछाते रहे हैं लोग